द कश्मीर फाइल्स मूवी सच स्टोरी 2022

कृष्‍णा पंडित किस सच के साथ खड़ा है? The Kashmir Files की शुरुआत से The End तक, समझ‍िए सबकुछ

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Kashmir Inside Story: 72 साल पहले ऐसे भारत में शामिल हुआ था कश्‍मीर
1947 में आजादी के बाद तब पाकिस्तान नया-नया बना था. अब एक तरफ हिंदुस्तान था, दूसरी तरफ पाकिस्तान और बीच में ज़मीन का ये एक छोटा सा टुकड़ा.. कश्मीर. एक …

Kashmir Inside Story_ 72 साल पहले ऐसे भारत में शामिल हुआ था कश्_मीर – jammu kashmir history reality conflic story section 370 pok attack crime – AajTak

आज़ाद हिंदुस्तान से पहले कश्मीर एक अलग रियासत हुआ करती थी. तब कश्मीर पर डोगरा राजपूत वंश के राजा हरि सिंह का शासन था. डोगरा राजवंश ने उस दौर में पूरी ..

विवेक अग्‍न‍िहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्‍म ‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ (The Kashmir Files) को लेकर देशभर में गजब का क्रेज देखने को मिल रहा है। कश्‍मीरी पंडितों पर 1990 के दौर में हुए बर्बर अत्‍याचार पर बनी यह फिल्‍म जहां बॉक्‍स ऑफिस पर बंपर कमाई कर रही है, वहीं सिनेमाघरों में जमकर नारेबाजी हो रही है। अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्‍लवी जोशी और दर्शन कुमार जैसे सितारों से सजी इस फिल्‍म की कहानी (The Kashmir Files Story) 1989 में शुरू हुए कश्‍मीरी पंडितों के घाटी से पलायन पर आधारित है। फिल्‍म को लेकर दो तरह की बातें हो रही हैं। एक जो पॉप्‍युलर है कि फिल्‍म ने नरसंहार के सच को दुनिया के सामने रखा है और दूसरी वो कि फिल्‍म ने कला और सिनेमा के नाम पर कुछ ऐसा दिखाया है जो शांति और अमन से जी रहे समाज को बांटने का काम कर रहा है। फिल्‍म को लेकर तमाम तरह की बहस हो रही है। लेकिन इसी बीच ओपनिंग डे पर 700 स्‍क्रीन्‍स पर रिलीज हुई यह फिल्‍म पहले वीकेंड से 2000 स्‍क्रीन्‍स पर दिखाई जा रही है और अब दूसरे वीकेंड से 4000 स्‍क्रीन्‍स से अध‍िक पर दिखाई जाएगी। इसका सच, उसका सच और इन सब के बीच आधा सच, जिसके बीच दर्शक और आम जनता भी है, जो फिल्‍म की कहानी और किरदारों के बीच उलझकर रह जाती है। आइए, इसी उलझन को सुलझाते हैं।
द कश्‍मीर फाइल्‍स का प्‍लॉट | The Kashmir Files Plot Summary
फिल्‍म का पहला फ्रेम एक प्‍यार भरे माहौल में दहशत की दस्‍तक से शुरू होता है। कुछ बच्‍चे टीवी देख रहे हैं। क्रिकेट का मैच चल रहा है। एक बच्‍चा सचिन तेंदुलकर की परफॉर्मेंस पर खुश होता है। सचिन-सचिन के नारे लगाता है। दूसरा बच्‍चा उसे आकर चुप करवाता है। कहता है कि नारेबाजी मत करो। तभी वहां कुछ बड़े आते हैं और सचिन का नारा लगाने वाले बच्‍चे को पीटने लगते हैं।’द कश्‍मीर फाइल्‍स’ की कहानी दहशत की इसी दस्‍तक से आगे बढ़ती है। फिल्‍म बताती है कि 19 जनवरी 1990 की उदास शाम थी। कश्मीर में सामाजिक-राजनीतिक अशांति थी। घाटी में नारे गूंज रहे थे। धरती के स्वर्ग के आसमान को डर और अनहोनी के बादलों ने घेर लिया था। एक नेता और कश्मीरी पंडित टीकालाल टपलू की कुछ महीने पहले हत्या कर दी गई थी। समाज का ध्रुवीकरण हो गया था और साम्प्रदायिक घृणा ने पूरी घाटी को अपनी चपेट में ले लिया था। इसी कड़ी में पुष्कर नाथ पंडित (अनुपम खेर) का परिवार भी इस हंगामे के बीच फंस गया है। शिवा उनका पोता है। वह अभी भी अपने दोस्त अब्दुल के साथ बाहर है। कांपते हुए पुष्कर नाथ दोनों बच्चों को उठाकर घर ले जाते हैं। जेकेएलएफ (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) के एरिया कमांडर फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे जबरदस्ती उनके घर में घुस जाता है। वह पुष्कर के बेटे की तलाश कर रहा है, जिसके खिलाफ भारत सरकार का मुखबिर होने का आरोप लगाते हुए फतवा जारी है। फारूक अहमद डार ने पुष्कर के बेटे को बेरहमी से गोली मारी और परिवार के अन्य सदस्यों को छोड़ दिया, क्योंकि वह चाहता था कि तबाही की खबर भारत के कोने-कोने में फैल जाए।

‘द कश्मीर फाइल्स’ की कहानी यहां से 30 साल आगे बढ़ती है। हम देखते हैं कि पुष्कर नाथ पंडित के चार दोस्त उनके पोते कृष्‍णा के आने का इंतजार कर रहे हैं। ब्रह्मा दत्त और उनकी पत्नी लक्ष्मी दत्त, डॉ महेश कुमार, डीजीपी हरि नारियन, और विष्णु राम का इंतजार बेसब्र है। तय होता है कि कोई भी पुष्‍कर नाथ के जवान पोते के सामने पलायन के बारे में बात नहीं करेगा। कृष्‍णा 1990 में परिवार के पलायन के लंबे समय बाद कश्‍मीर आ रहा है।

अब हम पुष्कर नाथ पंडित के पोते कृष्णा पंडित को जेएनयू में पढ़ते और यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट बनने के लिए चुनाव लड़ते हुए देखते हैं। हम उसे ऐसे लोगों से घिरे हुए देखते हैं जो यह मानते हैं कि कश्मीर को एक स्वतंत्र राज्य घोषित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भारत सरकार कश्मीर के लोगों के साथ अन्याय कर रही है और इससे भी जरूरी बात यह है कि वहां रहने वाले युवाओं का भविष्य खराब कर रही है। यह भी कि कश्मीर में युवाओं को पथराव करना ही था, क्योंकि भारत सरकार ने उनके पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा था। कृष्णा की टीचर राधिका मेनन इस बारे में बहुत वोकल है। वह उसे गाइड करती है और बताती है कि उसे यह नैरेटिव बेचनी चाहिए जो लार्जर दैन लाइफ है।

कृष्णा उनकी बातें समझ नहीं पाता। उसे समझ नहीं आ रहा कि वह किस पर भरोसा करे। वह अपने दादा को देखता है, जो जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए लड़ रहे थे और विरोध कर रहे थे। वो आर्टिकल जिसने कश्‍मीर को एक विशेष दर्जा दिया था। पुष्कर नाथ अपने घर वापस जाना चाहते थे। उनका कहना है कि सपने तभी सच होते हैं जब आप उनका पीछा करते हैं। लेकिन उनकी यह दौड़ खत्‍म हो जाती है। उनके घर लौटने का सपना अधूरा रह जाता है। वह अपने पोते को कश्मीर में अपने घर में राख बिखेरने और अपने चार प्यारे दोस्तों से मिलने के लिए कहते हैं, जिनके साथ उनकी बहुत अच्छी यादें थीं।
पुष्कर नाथ पंडित ने अपने पोते से हमेशा कहा था कि उनके माता-पिता और बड़े भाई शिव की एक दुर्घटना में मौत हो गई। वह नहीं जानता था कि उन्हें आतंकवादी समूह जेकेएलएफ द्वारा बेरहमी से मारा गया था। अपने दादाजी के दोस्तों की बात सुनकर उसकी सोच उलझनों में फंस जाती है। वह हमेशा मानता था कि कश्मीरी पंडितों का पलायन भारत सरकार द्वारा रचा गया एक धोखा था। लेकिन अब उसने महसूस किया कि जो सच सामने था, वह एक मुखौटा था। उसकी टीचर राधिका मेनन ने उसे घाटी में किसी से मिलने के लिए कहा था, ताकि वह कश्मीर की असल दुर्दशा को समझ सके। वह शख्स असल में फारूक अहमद डार था, जिसने उसके माता-पिता की हत्या की थी। वह आतंकवादी नेता अब खुद प्यार और शांति का झंडा लेकर सबसे आगे चल रहा है। वह कृष्णा से कहता है कि उसके परिवार को भारतीय सेना ने मारा था, न कि जेकेएलएफ के लोगों ने।

कृष्णा वापस आता है और ब्रह्म दत्त पर आरोप लगाता है कि उन्होंने उसे किसी ऐसी चीज पर भरोसा करने के लिए गुमराह किया जो पूरी तरह से बनावटी है। सच्‍चाई से कोसों दूर। तभी ब्रह्म दत्त अपने शांत स्वभाव से उलट आपा खो देते हैं। ब्रह्म दत्त देखते हैं कि उनके दोस्त का पोता यह मान रहा है कि निर्दोष कश्मीरी पंडितों को और यहां तक कि उसके अपने परिवार की मौत के लिए कोई और जिम्‍मेदार है। अब वह कृष्णा को वो सब बताते हैं, जो उन्‍होंने देखा था। उन्होंने बीते हुए कल और दहशत के उस दौर में हुई हत्‍याओं का एक-एक सिरा कृष्‍णा के सामने खोलकर रख दिया। कृष्णा को अब हर एक बात की विस्‍तार से जानकारी है। वह अपनी फैमिली के बलिदान और कश्‍मीरी पंडितों को सता रहे दर्द को जानता है। वह जानता है कि कैसे उसकी मां ने खून से सने हुए चावल खाए और कैसे उसके दादा ने उसकी पढ़ाई के लिए पैसे बचाए।

कृष्‍णा वापस जेएनयू जाता है। वह इस बार फिर बोलता है। लेकिन वो नहीं, जो उसने पढ़ा था या वो नहीं जो उसे राधिका मेनन ने बताया था। वह दिल से बोलता है। उसने जो देखा और जो महसूस किया, उसके बारे में बोलता है। वह एक ऐसे परिवार से आया था, जिसने बर्बर अत्याचार को देखा था, और जिसके सामने आशंकाओं की गुंजाइश नहीं थी। कृष्णा पंडित ने अब अपनी खुद की बात रखी। इस बार वह किताब की व्‍याख्‍याओं या अब तक बताई गई, पढ़ाई गई बातों से प्रभावित नहीं हुआ। उसने उन आंखों में दुर्दशा देखी थी और वह जानता था कि शब्द भ्रम पैदा कर सकते हैं, लेकिन आंखें कभी झूठ नहीं बोलतीं।

‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ में नदीमर्ग की वह घटना भी दिखाई गई है, जिसमें 24 कश्मीरी पंडितों को बिना सोचे-समझे गोली मार दी गई थी। इस कत्‍ल-ए-आम को फिल्‍मी पर्दे पर दिखाया तो गया है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि यह घटना 2003 की थी। और तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। पर्दे पर इस तरह की घटना को देखना भयावह है। यह सच है कि कश्‍मीरी पंडितों के दर्द पर सिनेमाई पर्दे पर बहुत कम बात हुई है। यह भी सच है कि ‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ ने जिस मुद्दे को उठाया है, उसकी तारीफ होनी चाहि‍ए। लेकिन यह भी सच है कि फिल्‍म जो दिखा रही है, वह क्रूरता की हद है। यह एकतरफा कहानी भी है, क्‍योंकि पूरी फिल्‍म में एक भी किरदार ऐसा नहीं दिखाया गया है जो दूसरी तरफ की कहानी बताए। यानी एक भी किरदार उस समुदाय विशेष से नहीं है, जिसे फिल्‍म में नेकदिल दिखाया गया है। यह अपने आप हैरान करने वाली बात है कि मेकर्स ने इस पक्ष का ध्‍यान कैसे नहीं रखा।
फिल्‍म 170 मिनट की है। विवेक अग्‍न‍होत्री फिल्‍म के डायरेक्‍टर हैं। अनुपम खेर ने फिल्‍म में पुष्‍कर नाथ पंडित का किरदार निभाया है। कृष्‍णा के किरदार में दर्शन कुमार हैं। फिल्‍म 8 दिनों में भारतीय बॉक्‍स ऑफिस पर 114.50 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है।

the kashmir files explained

The Kashmir Files is a 2022 Indian Hindi-language drama film,[2] written and directed by Vivek Agnihotri. Produced by Zee Studios,[5] the film is based on the exodus of Kashmiri Pandits during the Kashmir insurgency,[6] which it portrays as a genocide[12] by utilizing a fictional storyline.[13] It stars Anupam Kher, Darshan Kumar, Pallavi Joshi and Mithun Chakraborty.[14] The film was theatrically released on 11 March 2022.[15]

The film has been endorsed, promoted and provided with tax-free status in multiple states by the ruling Bharatiya Janata Party,[16][17] leading to significant audiences and commercial success.[18] Critical reception has been mixed,[16] the cinematography and the performances of the cast were described to be compelling,[22] but the film faced accusations of historical revisionism,[23] and of being propaganda aligned with the ruling party,[26] aiming to foster prejudice against Muslims.[27] Supporters have praised it for showing what they say is a part of Kashmir’s history that has been overlooked,[13] while theatres across India have witnessed hate speeches including calls for killing Muslims, often provoked by activists of the ruling party and related Hindutva organisations.

द कश्मीर फाइल्स’ एक भारतीय हिंदी फिल्म है। यह अभिषेक अग्रवाल द्वारा निर्मित है जिसमें मिथुन चक्रवर्ती और अनुपम खेर ने अभिनय किया है। यह विवेक अग्निहोत्री द्वारा लिखित और निर्देशित है। ज़ी स्टूडियोज़ द्वारा निर्मित यह फिल्म,[3] कश्मीरी हिंदू पंडितों के साथ वीडियो साक्षात्कार पर आधारित वास्तविक घटनाओं पर आधारित है, जो कश्मीरी विद्रोह के दौरान कश्मीर नरसंहार से पीड़ित हुए हैं।[4] 4 मार्च 2022 को इसका विशेष प्रीमियर हुआ था।[5] यह फिल्म पहले 26 जनवरी 2022 को रिलीज़ होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस और ओमिक्रोन के कारण यह अभी 11 मार्च 2022 को रिलीज़ हुई है। इसमें मिथुन चक्रवर्ती, अनुपम खेर, दर्शन कुमार, पल्लवी जोशी, भाषा सुंबली, चिन्मय मांडलेकर, पुनीत इस्सर, प्रकाश बेलावड़ी, अतुल श्रीवास्तव इत्यादि कलाकारों की भूमिका है।[6] यह बॉक्स ऑफिस पर सफल रही,[7][8] हालांकि आलोचनात्मक स्वागत मध्यम रहा है।[9][10] इसे हरियाणा,[11] मध्य प्रदेश,[12] गुजरात,[13] उत्तराखंड और कर्नाटक[14] में कर-मुक्त घोषित किया गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी सफलता बन गई है, रिलीज के पहले हफ्ते में बॉक्स ऑफिस पर एक छोटे बजट की हिंदी फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड स्थापित कर रही है।[15]संयुक्त राज्य अमेरिका में फिल्म की प्री-स्क्रीनिंग के दौरान, रोड आइलैंड के राज्य प्रतिनिधि ‘ब्रायन पैट्रिक कैनेडी’ ने विवेक रंजन अग्निहोत्री को उनके फिल्म के लिए बधाई दी।

Plot

The plot frequently switches between the contemporary period set in the year 2020 and flashbacks to 1989–1990 throughout the film.

Circa 1989–1990

In 1989–90 Kashmir, Islamic militants storm and banish Kashmiri Hindu Pandits from the Kashmir valley using the slogans Raliv Galiv ya Chaliv (“convert (to Islam), leave or die”) and Mustafa Batte Safa (“with god’s grace whole Kashmiri Pandit community will leave valley”). Pushkar Nath Pandit, a teacher, fears for the safety of his son Karan, who has been accused by the militants of being an Indian spy. Pushkar requests his friend Brahma Dutt, a civil servant, for Karan’s protection. Brahma travels with Pushkar to Kashmir and witnesses the violence against Kashmiri Pandits. He takes up the issue with the chief minister of Jammu and Kashmir (J&K), who suspends Brahma.

Militant commander Farooq Malik Bitta, also a former student of Pushkar, breaches Pushkar Nath’s house. Karan hides in a rice container but is found and shot by Bitta. Pushkar and his daughter-in-law Sharda plead for their lives. Bitta compels Sharda to eat rice soaked in Karan’s blood in exchange for their lives. After Bitta and his gang leave the house, Pushkar takes Karan to the hospital and requests his doctor friend Mahesh Kumar to save Karan’s life. However, the hospital gets taken over by militants, who forbid the hospital staff from treating non-Muslims. Subsequently, Karan succumbs to injuries from the gunshots.

To ensure their safety, Pushkar and his family are taken by their journalist friend Vishnu Ram to Kaul, a Hindu poet who maintains a cordial relationship with Muslims. Kaul takes in many Pandits into his home but a group of militants arrives to pick Kaul and his son up under the guise of offering protection. The rest of the Pandits leave the place but are later shocked to find corpses of Kaul and his son hanging from trees.

The refugee Pandits from the Kashmir valley settle in Jammu and live on meagre ration and in poor conditions. Brahma is appointed as an advisor to the new Governor of J&K. At his request, the Home Minister visits the Jammu camps where Pushkar demands the removal of Article 370 and the resettlement of Kashmiri Pandits. Brahma manages to get Sharda a government job in Nadimarg in Kashmir, and the family moves there.

One day a group of militants headed by Bitta dress up as members of the Indian Army and arrive at Nadimarg. They start rounding up the Pandits living there. Sharda resists when the militants get hold of her elder son Shiva. Angry Farooq strips her and saws her body in half. He lines up Shiva and the remaining Pandits and shoots them into a mass grave. Pushkar is spared to spread the word about what happened.

2020

In the present day, Sharda’s younger son Krishna is brought up by Pushkar. He believes that his parents had died in an accident. A student of ANU,[a] Krishna is under the influence of professor Radhika Menon who is a supporter of Kashmiri separatism. Pushkar’s friends Brahma, Vishnu, Mahesh, and police officer Hari Narain, who had served in Kashmir when Karan was killed, recall the events of Kashmir from their memory that Brahma calls a “genocide“.

Krishna contests the ANU’s student election. Following the advice of professor Radhika Menon, he holds the Government of India responsible for the issue of Kashmir, much to the anger of Pushkar. Later, when Pushkar dies, Krishna travels to his ancestral home in Kashmir to scatter the ashes per Pushkar’s last wish. Menon asks Krishna to record some footage in Kashmir to expose the government’s supposed atrocities. With the help of one of Menon’s contacts, Krishna meets Bitta and accuses him of being responsible for the situation of the Pandits. But Bitta declares himself to be a new-age Gandhi who is leading a non-violent democratic movement. Bitta claims that it was the Indian Army, who killed Krishna’s mother and brother. When Krishna questions Brahma about this claim, Brahma hands him newspaper cuttings (collected by Pushkar), which had reported that militants disguised as Indian Army soldiers killed them.

Krishna returns to Delhi and gives his scheduled speech for the university presidential elections to a roaring crowd at the ANU campus. He elaborates on the history of Kashmir and the plight of his family and other Kashmiri Hindu victims that he perceived from his trip. This is shocking to his mentor Professor Menon and her other students. Krishna is then met with resistance and ridicule from students and an eventual embrace by a few.

Cast

The Kashmir Files Box Office

All amounts in their respective local currencies

INDIA BOX OFFICE COLLECTION

Schedule Amount
Opening Day 3.55 cr.
End of Opening Weekend 27.15 cr.
End of Week 1 97.30 cr.
End of Week 2 207.33 cr.
Lifetime Collection 207.33 cr.

DAY WISE BOX OFFICE COLLECTION

Day Date Amount
Day 1 11-Mar-2022 (Fri) ₹3.55 cr. N/A
Day 2 12-Mar-2022 (Sat) ₹8.50 cr. +139.44%
Day 3 13-Mar-2022 (Sun) ₹15.10 cr. +77.65%
Day 4 14-Mar-2022 (Mon) ₹15.05 cr. -0.33%
Day 5 15-Mar-2022 (Tue) ₹18 cr. +19.60%
Day 6 16-Mar-2022 (Wed) ₹19.05 cr. +5.83%
Day 7 17-Mar-2022 (Thu) ₹18.05 cr. -5.25%
Day 8 18-Mar-2022 (Fri) ₹19.15 cr. +6.09%
Day 9 19-Mar-2022 (Sat) ₹24.80 cr. +29.50%
Day 10 20-Mar-2022 (Sun) ₹26.20 cr. +5.65%
Day 11 21-Mar-2022 (Mon) ₹12.40 cr. -52.67%
Day 12 22-Mar-2022 (Tue) ₹10.25 cr. -17.34%
Day 13 23-Mar-2022 (Wed) ₹10.03 cr. -2.15%
Day 14 24-Mar-2022 (Thu) ₹7.20 cr. -28.22%

WEEK WISE BOX OFFICE COLLECTION

Day Amount
Week 1  97.30 cr. N/A
Week 2  110.03 cr. +13.08%

WEEKEND BOX OFFICE COLLECTION

Day Amount
Weekend 1  27.15 cr. N/A
Weekend 2  70.15 cr. +158.38%

TERRITORY WISE BOX OFFICE COLLECTION

Day Amount
Mumbai  27.09 cr. View
Delhi-U.P  26.33 cr. View
East Punjab  13.00 cr. View
CP  4.66 cr. View
CI  3.89 cr. View
Rajasthan  5.02 cr. View
Nizam-AP  3.57 cr. View
Mysore  4.19 cr. View
West Bengal  4.50 cr. View
Bihar & Jharkhand  1.93 cr. View
Assam  0.96 cr. View
Orissa  1.01 cr. View
Tamil Nadu & Kerala  0.65 cr. View

CINEMA CHAIN BOX OFFICE COLLECTION

Cinema Amount
PVR  19.75 cr. View
INOX  20.09 cr. View
Carnival  4.15 cr. View
Cinepolis  8.66 cr. View
SRS  0.13 cr.
City Pride  1.52 cr.
Miraj  3.80 cr.
Rajhans  1.76 cr.
Maxus  0.75 cr.
Priya  0.06 cr.
SVF  0.31 cr.

OVERSEAS BOX OFFICE COLLECTION

Schedule Amount (in mil. USD)
Opening Weekend 1.50
Total Overseas Gross 3.67

WORLDWIDE GROSS BOX OFFICE COLLECTION

Schedule Amount
India box office Nett cr.  207.33 cr.
India box office Gross cr.  246.82 cr.
Overseas Gross cr.  27.94 cr.
Worldwide collections Gross cr.  274.76 cr.

AUSTRALIA BOX OFFICE COLLECTION

Date Rank Weekend Amount (in A$) Screens Total Gross (in A$)
11-Mar-2022 13 97,585 15 97,585

GERMANY BOX OFFICE COLLECTION

Date Rank Weekend Amount (in EUR) Screens Total Gross (in EUR)
11-Mar-2022 33 12,335 8 12,335

UNITED KINGDOM BOX OFFICE COLLECTION

Date Rank Weekend Amount (in Pound) Screens Total Gross (in Pound)
11-Mar-2022 15 58,641 18 58,641

UNITED STATES OF AMERICA BOX OFFICE COLLECTION

Date Rank Weekend Amount (in USD) Screens Total Gross (in USD)
11-Mar-2022 N.A. 453,205 N.A. 453,205

Production

On 14 August 2019, Agnihotri announced the film with its first look poster with an intent to release it on 15 August 2020, coinciding with India’s Independence Day. The subject of the film was the exodus of Kashmiri Pandits that took place between the late 80s and early 90s.[32][33] Agnihotri touted the film to be the second instalment of his trilogy of “untold stories of independent India”, which includes the films The Tashkent Files (2019) and an upcoming The Delhi Files.[34] As a part of the production, Agnihotri claimed to have interviewed more than 700 emigrants from the exodus and recorded their stories over a period of two years.[35] Actor Anupam Kher joined the cast as the lead actor of the film in December 2019.[36]

The first schedule of the film, supposed to take place in March 2020, was called off due the COVID-19 pandemic in India,[37] and was started later the same year in December in Mussoorie.[38] The entire film was shot in 30 days, largely in Mussoorie and Dehradun, along with a week-long shooting schedule in Kashmir, including at Dal Lake.[39] Yograj Singh was removed before the production started in December 2020 for his speeches at the 2020–2021 Indian farmers’ protest, and Puneet Issar was brought in as the replacement.[38][40] A line producer, Sarahna died during the production by suicide.[41] The production was wrapped up by 16 January 2021.[42]

Release

Litigations

public interest litigation (PIL) was filed by an Uttar Pradesh resident which sought a stay on the film’s release on grounds that the film may portray the Muslims as killers of the Kashmiri Pandits, presenting what it described as a one-sided view that would hurt the sentiments of Muslims and could trigger violence against Muslims. The PIL was dismissed by the Bombay High Court on grounds that the filer should have challenged the certificate issued to the film by the Central Board of Film Certification.[43]

Another lawsuit was filed by the widow of an Indian Armed Forces squadron leader who died during the Kashmir Insurgency. The widow’s lawsuit said that the film portrayed a false depiction of events related to her husband and sought a stay on its release. Accordingly, the court restrained the makers from showing the relevant scenes.[44]

Theatrical release

The Kashmir Files was set to release theatrically worldwide on 26 January 2022, coinciding with India’s Republic Day, but was postponed due to the spread of the Omicron variant of COVID-19.[45] It was initially released in over 630 screens in India on 11 March 2022[46] and was later increased to 4,000 screens.[47]

International release

The Kashmir Files has received an R16 classification from the New Zealand Classification Office, with a scheduled release date of 24 March 2022. British and Australian censors have given the film an R18 and 18+ plus rating respectively.

In New Zealand, members of the Muslim community raised concerns with chief censor David Shanks that the film could promote Islamophobia, citing intercommunal tensions relating to the film’s release in India. Shanks stated that the film’s R16 classification did not mean that the film was being banned.[48][49] In response to the film’s R16 classification in New Zealand, former Deputy Prime Minister and New Zealand First party leader Winston Peters claimed that the film’s age restricted classification amounted to censorship of terrorist actions during the 9/11 attacks and the Christchurch mosque shootings. He added that efforts towards combating Islamophobia should not be use to “shield the actions of terrorists in the name of Islam.”[49][50] In addition, a Change.org petition was organized defending the film’s authenticity and disputing claims of Islamophobia.[50] Several representatives of the Indian community rejected the depictions and called for the release of the film. In addition, former National Party Member of Parliament Kanwaljit Singh Bakshi and ACT party leader David Seymour also called for the film’s release.[51]

Government and ruling party support

The ruling Bharatiya Janata Party (BJP) has endorsed and promoted the film in explicit terms,[16][52][53][54] which has led to significant audience at theatres making it a runaway commercial success.[18] Union Minister Smriti Irani was one of the most vocal in promoting it.[16] Prime Minister Narendra Modi has attacked critics in response to negative reviews, claiming that there is a conspiracy to discredit the film, which according to him “reveals the truth”; he met with Agnihotri to congratulate him, as did Home Minister Amit Shah.[53][55] The BJP Information and Technology Cell, known for being the party’s propaganda unit promoted the film with its head raising calls for people to watch it.[53] Agnihotri was also provided with a Y-category security detail from the Central Reserve Police Force across the country by the Ministry of Home Affairs.[56] Pro-government media were also involved in its promotion; OpIndia — a pro-Hindutva news portal — published several articles raining praises on the film and questioning the motives of critics as well as opposition parties while television channels hosted multiple shows and debates to the same ends.[53]

The film was declared tax-free in multiple BJP governed states—GoaGujaratHaryanaKarnatakaMadhya PradeshTripuraUttar PradeshUttarakhandBihar and Himachal Pradesh—with calls by several chief ministers and Members of Parliament for “everyone to watch the movie”.[52][57][58][59][60] Assam and Madhya Pradesh granted vacations to government employees and police personnel respectively, if they planned to watch the movie, and Assam, Karnataka and Tripura governments held special screenings of the film.[53] In addition, in the states of ChhattisgarhMaharashtra and West Bengal, which have opposition parties in power, BJP legislators have called for their respective state governments to make the film tax-free.[53] Across the country, BJP legislators have bought out screens for audiences to watch the movie for free.[53]

Critical reception

Kher’s performance in The Kashmir Files was generally praised by the film critics.[20][21]

Stutee Ghosh, reviewing for The Quint, rated the film 3.5 out of 5 and found the film to have made a compelling case for Kashmiri pandits and their “hitherto unaddressed wounds” but wished for more nuance; the cinematography (especially the colour palette), Anupam Kher’s acting, and realist depictions were praised in particular.[19] Likewise, Jagadish Angadi of Deccan Herald was effusive in his praise — Agnihotri’s use of non-linear narratives and strong dialogues, enviable background research, and strong individual performances produced an “intense watch”.[20] Avinash Lohana of Pinkvilla rated the film 3 out of 5 stars, praising the cast performances—particularly that of Kher’s—and behind-the-scenes research, but criticised the lack of balance.[21]

Shubhra Gupta reviewing for The Indian Express rated the film 1.5 out of 5 stars, criticising the film for being uninterested in nuance and describing the film as propaganda aligned with the ruling party, that aimed to stoke the “deep-seated anger” of Pandits.[24] However, she also stated that the film did tap “into the grief of the displaced Pandits,” and commended Kher’s performance.[24] Anuj Kumar reviewing for The Hindu described the film as being composed of “some facts, some half-truths, and plenty of distortions” with brutally intense visualisations and compelling performances, aimed at inciting hatred against Muslims.[8] Rahul Desai reviewing for Film Companion, called the work a “fantasy-revisionist” rant lacking in clarity, craft, and sense where every Muslim was a Nazi and every Hindu, a Jew; with an unconvincing screenplay and weak characters, it was propaganda that strove only to tune in with the Hindu nationalist mood of the nation rather than offer genuine empathy to the displaced victims.[61]

Tanul Thakur, reviewing for The Wire, was scathing: the film—”monotonous”, “inert”, and boasting of an “objectively poor screenplay”—was set up in an alternate reality and felt like iterations of collected Whatsapp screeds in service of a Hindu majoritarian state and esp. Narendra Modi; Agnihotri lured the audience with facts only to distort and communalize them, and target those who are critical of the incumbent political regime in India.[62] Asim Ali, reviewing for Newslaundry, found the film to have exploited the sufferings of Kashmiri Pandits in pedaling a Hindu Nationalist worldview where no Muslim in Kashmir had any aspiration except persecuting Hindus.[9] Shilajit Mitra of The New Indian Express panned the film with a rating of 1 out of 5 stars and castigated Agnihotri for exploiting the suffering of Kashmiri Pandits by doing away with all nuance in service of a “communal agenda”.[7] Rohit Bhatnagar of The Free Press Journal found the screenplay as well as individual performances to be sloppy, thus failing to make any mark; however, he admired the effort that went behind the film and rated it 2.5 out of 5 stars.[63]

Political messaging and historical accuracy

The film’s producer Vivek Agnihotri claims the film to be a depiction of the “truth of Kashmir”.[64] Its key message is that what is known as the exodus of Kashmiri Pandits is actually a “genocide” — a fact that it claims to have been kept out of history textbooks and mainstream discourse deliberately.[7][10]

The film’s exclusive focus on violence of Muslims on Hindus—with limited attention given to the overall history of human rights abuses in the state[b]—and especially, the painting of all Muslims as active or passive participants in the exodus has been seen as promoting Islamophobia.[64][69][70] The film has also faced charges of historical revisionism and unnuanced storytelling.[73][16][74] Several critics have compared Agnihotri with Riefenstahl, a Nazi propagandist.[75][61]

The film is seen depicting the Jawaharlal Nehru University[a] as an unpatriotic institution sympathetic to terrorism.[64] Article 370 of the Constitution that granted nominally autonomous status to Jammu and Kashmir, is named as one of the reasons for the displacement of Kashmiri Pandits.[64] Blame is also attached to Farooq Abdullah, the chief minister of Jammu and Kashmir in 1990; the former prime minister Rajiv Gandhi; and Mufti Mohammad Sayeedhome minister in 1990 and a person of Kashmiri heritage. The serving prime minister V. P. Singh (in 1990), and the Bharatiya Janata Party that supported his government, appear to be absolved of responsibility by the film.[64][9][76] The central character Krishna Pandit is shown as being provoked by terrorists to turn against the present-day prime minister Narendra Modi.[64] The former prime minister Atal Bihari Vajpayee is also subtly derided for attempting to win the hearts of Kashmiris.[8]

Kashmiri separatist militant named Farooq Malik Bitta is depicted in the movie, fashioned after Farooq Ahmed Dar (“Bitta Karate”) and Yasin Malik rolled into one. But he is also shown as being involved in the 2003 Nadimarg massacre, which was of neither’s doing. Sharda, fashioned after Mrs. Ganjoo, is shown to have been killed in this massacre, which was not the case in real life.[64][77] Further, local Muslims are portrayed as passive participants in the event and the local cleric even denounced Sharda, moments before she was sawed to death; in reality, the massacre transpired in the dead of the night with almost no witness and the sawing was extrapolated from a separate case involving one Girija Tickoo, some 13 years ago.[10] Neither are the facts of Bitta Karate’s long years of incarceration despite a lack of conviction or Malik’s eventual conversion to non-violent means of struggle mentioned.[8][78][10]

Hate speeches

At the theatres, Hindutva activists raised slogans advocating for violence against Kashmiri Muslims as well as Indian Muslims in general. In one instance, calls were made to “[s]hoot the traitors to the nation” by members of the Hindu Jagran Manch, a member of the Sangh Parivar.[28] In Jammu, a Kashmiri Pandit activist and his family were heckled by a mob of activists allegedly belonging to the BJP, for he had labelled the film exploitative of the Pandit community.[79]

Box office

The Kashmir Files opened to box office with an earnings of 35.5 million (US$470,000), ₹85 million (US$1.1 million) and ₹151 million (US$2.0 million) in India respectively on its first three days, taking its opening weekend collection to ₹271.5 million (US$3.6 million) and an estimated ₹50 million (US$660,000) in India and overseas respectively.[4][80] After the response from the first two days, the screens were increased to 2,000 on 13 March 2021.[81] With a collections growth of 323% on its first Monday compared to the release day, the film broke the record for the highest increase in collections for an Indian film on its first Monday.[82] At the end of the first week, the film earned ₹973 million (US$13 million) at the Indian box office.[4] After the response from the first week, the screens were increased to 4,000 on 18 March 2021.[47]

The film emerged as a box-office success within its first two days of release.[83][84] As of 24 March 2022, the film grossed ₹2,468.2 million (US$32 million) in India and ₹279.4 million (US$3.7 million) overseas, for a worldwide gross collection of ₹2,747.6 million (US$36 million).[4]

Notes

कथानक[संपादित करें]

यह फिल्म कश्मीरी पंडित नरसंहार की पहली पीढ़ी के पीड़ितों के साथ 700 से अधिक वीडियो साक्षात्कारों पर आधारित वास्तविक घटनाओं पर आधारित है।[16][17][18] फिल्म को संपूर्ण मंजूरी मिली है।[19]जनता के बड़े पैमाने पर समर्थन के साथ, कई राज्य सरकारों ने इसे कर मुक्त कर दिया है। [20] फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के आसपास की स्थिति को दर्शाती है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जे.एन.यू.) के कृष्ण पंडित नामक एक युवा छात्र की कश्मीर यात्रा पर केंद्रित है, जिसे यह विश्वास दिलाया गया था कि उसके माता-पिता एक दुर्घटना में मारे गए थे, जैसा कि उनके दादा पुष्कर नाथ ने बताया था। (अनुपम खेर). वह जेएनयू की प्रोफेसर राधिका मेनन (पल्लवी जोशी) के प्रभाव में भी थे, जो “कश्मीर कारण” में विश्वास करती हैं। अपने दादा की मृत्यु के बाद, वह अपने शरीर की राख को कश्मीर ले जाता है, जब उसे अपने माता-पिता की मृत्यु की वास्तविक परिस्थितियों के बारे में पता चलता है, जो कि बी के गंजू (1990 में मारे गए एक इंजीनियर) की हत्या के बाद की है।

फिल्म पलायन के आसपास की घटनाओं को “नरसंहार” के रूप में चित्रित करती है, जिसमें हजारों कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार किया गया था, महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था और बच्चों को गोली मार दी गई थी। विस्थापित परिवारों को आज तक शरणार्थी के रूप में जीवित दिखाया गया है। फिल्म मामूली बजट के साथ बनाई गई थी,परन्तु संग्रह कई गुना बढ़ गया।[21] फिल्म को विदेशी सरकारों द्वारा भी मंजूरी दे दी गयी है।[16][22]

निर्माण[संपादित करें]

14 अगस्त 2019 को, अग्निहोत्री ने अपने प्रथम दृष्टया पोस्टर के साथ फिल्म की घोषणा करते हुए कहा, “यह फिल्म सबसे बड़ी मानव त्रासदियों में से एक की ईमानदार जांच होगी”। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने हिमालय में एक अज्ञात स्थान पर स्थित पटकथा को पूरा किया। फिल्म का विषय कश्मीरी पंडितों का पलायन था जो 80 के दशक के अंत और 90 के दशक की शुरुआत में हुआ था।[23] उत्पादन के एक हिस्से के रूप में, विवेक अग्निहोत्री ने पलायन से 700 से अधिक प्रवासियों का साक्षात्कार लेने का दावा किया और दो साल की अवधि में उनकी कहानियों को रिकॉर्ड किया अभिनेता अनुपम खेर और मिथुन चक्रवर्ती 2020 में फिल्म के मुख्य अभिनेता के रूप में कलाकारों में शामिल हुए। फिल्म के पहले शेड्यूल को कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण बंद कर दिया गया था। योगराज सिंह को भारतीय किसान विरोध प्रदर्शन (२०२०-२०२१) के विरोध में उनके विवादास्पद भाषण के लिए हटा दिया गया था, और पुनीत इस्सर को प्रतिस्थापन के रूप में लाया गया था। सरहाना (एक लाइन प्रोड्यूस) की प्रोडक्शन के दौरान आत्महत्या करने से मौत हो गई।[24]

फिल्म समीक्षा[संपादित करें]

अधिकांश समीक्षकों ने इस फिल्म में अनुपम खेर और मिथुन चक्रवर्ती के अभिनय की प्रशंसा की है।

हिन्दुस्तान टाईम्स की मोनिका रावल कुकरेजा ने द कश्मीर फाइल्स को ‘दिल दहला देने वाला’ बताया और खेर को फिल्म का ‘स्पिरिट’ बताया। उन्होंने लिखा, “कश्मीर फाइल्स देखना आसान नहीं है। रातों-रात शरणार्थी बन गए लाखों पुरुषों और महिलाओं की त्रासदी को देखकर आप डरेंगे, सिसकेंगे और आखिरकार रो देंगे।”[25] फर्स्टपोस्ट के सत्य दोसापति ने इसे ‘उल्लेखनीय’ फिल्म कहा और लिखा, ‘‘द कश्मीर फाइल्स एक ऐसी फिल्म है जिसे सभी को दिखाने की जरूरत है। यह उन खतरों की याद दिलाता है जिनका भारतीय सभ्यता सामना कर रही है और यह समय आ गया है कि हम उन खतरों से निपटने के लिए अधिक दृढ़ और सशक्त तरीके से कार्य करें – जिनका सामना करना पड़ रहा है – और किया जा रहा है। फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने वह वह किया है जो भारत 31 साल तक करने में विफल रहा है — कश्मीरी हिन्दू नरसंहार का असली चेहरा दिखाकर।’’[26] तरण आदर्श, ने फिल्म को 5 में से 4.5 स्टार देते हुए इस फिल्म के बारे में कहा, “बहुत खूब, ‘द कश्मीर फाइल्स’ कश्मीर और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर सबसे शक्तिशाली फिल्म है … कठोर, कुंद, स्पष्ट ईमानदार … बस इसे मिस न करें।” [27]

इंडिया टुडे के चैती नरूला ने फिल्म को “आँख खोलने वाला” बताते हुए और प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए फिल्म को 5 में से 4 स्टार दिए। द क्विंट की स्तुति घोष ने फिल्म को 5 में से 3.5 का स्कोर दिया और लिखा, ‘‘द कश्मीर फाइल्स में कुछ बेहतरीन प्रदर्शन, विचारोत्तेजक पृष्ठभूमि स्कोर और कश्मीरी पण्डितों की यातना और हिंसा का एक सहानुभूतिपूर्ण चित्रण है’’, हालांकि उन्होंने लेखन में और अधिक विशिष्टता की कामना की। इसके साथ ही उन्होंने अनुपम खेर के अभिनय की भी विशेष रूप से प्रशंसा की। रीडिफ़.कॉम(Rediff.com) की समीक्षा करने वाले जोगिंदर टुटेजा ने अग्निहोत्री की सूक्ष्म फिल्मोग्राफी और कलाकारों के व्यक्तिगत प्रदर्शन की प्रशंसा की; फिल्म को 90 के दशक के कश्मीर का “वास्तविक इतिहास” बताते हुए, उन्होंने 5 में से 4 सितारों का मूल्यांकन किया। पिंकविला के अविनाश लोहाना ने 5 में से 3 स्टार दिए; कलाकारों के प्रदर्शन की प्रशंसा की – विशेष रूप से खेर के – और परदे के पीछे के शोध की लेकिन संतुलन की कमी की आलोचना की। इसी तरह, डेक्कन हेराल्ड के जगदीश अंगदी ने अग्निहोत्री के संघर्ष के विभिन्न पहलुओं के दस्तावेजीकरण के बारे में उनकी प्रशंसा की। कोइमोई के ओशिन कौल ने फिल्म को 5 में से 4 स्टार दिए और लिखा, ‘‘विवेक रंजन अग्निहोत्री ने वह करने में कामयाबी हासिल की है जो पिछले 32 सालों में दूसरे नहीं कर सके। उनकी तेज से और स्पष्ट दृष्टि ने उन्हें न केवल कश्मीरियों से बल्कि उन लोगों से भी प्रशंसा दिलाई, जिन्होंने दर्द महसूस किया।’’[28]

इसके विपरीत, द इंडियन एक्सप्रेस की शुभ्रा गुप्ता ने फिल्म को 5 में से 1.5 स्टार दिए;कहा-बारीकियों में कोई दिलचस्पी नहीं है, यह फिल्म प्रभावी रूप से सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवचन के साथ प्रचार का काम थी, जिसका उद्देश्य पंडितों के “गहरे गुस्से” को भड़काना था लेकिन इसने एक विस्थापित समुदाय के दुख को कम किया और खेर का प्रदर्शन सराहनीय था। “द फ्री प्रेस जर्नल” के रोहित भटनागर ने पटकथा के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रदर्शनों को भी खराब पाया, इस प्रकार “बड़े कैनवास पर दुःख का अनुवाद” करने और कोई छाप छोड़ने में विफल रहे; हालाँकि, उन्होंने फिल्म के पीछे के प्रयास की प्रशंसा की और 5 में से 2.5 स्टार रेटिंग दी। (‘द कश्मीर फाइल्स’ को फिल्म समीक्षकों से मिली-जुली समीक्षा मिली है। “द कश्मीर फाइल्स” में खेर के प्रदर्शन की आम तौर पर फिल्म समीक्षकों द्वारा प्रशंसा की गई थी।) द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के शिलाजीत मित्रा ने 5 में से 1 स्टार की रेटिंग के साथ फिल्म की आलोचना की और ‘सांप्रदायिक एजेंडा’ की सेवा में सभी बारीकियों को दूर करके कश्मीरी पंडितों की पीड़ा का शोषण करने का विवेक अग्निहोत्री पर आरोप लगाया।[29]

रिलीज और बॉक्स ऑफिस पर उत्साह[संपादित करें]

इस फिल्म को हरियाणामध्य प्रदेशगुजरातउत्तराखंडकर्नाटक में कर-मुक्त घोषित किया गया है।[30] इसे 11 मार्च 2022 को भारत में लगभाग 630 स्क्रीन पर रिलीज़ किया गया था। लेकिन फिर भी सीमित स्क्रीन के बावजूद फिल्म ने पहले दिन घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 3.55 करोड़ रुपये कमाए।[31] अपने दूसरे दिन, फिल्म ने 139.44% की वृद्धि दिखाई और ₹8.50 करोड़ कमाए, जिससे इसका कुल घरेलू बॉक्स ऑफिस संग्रह ₹12.05 करोड़ हो गया। सफल उद्घाटन के बाद, 13 मार्च 2022 को स्क्रीन को बढ़ाकर 2000 कर दिया गया और सप्ताहांत में ₹24 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया। रिलीज के दिन की तुलना में, द कश्मीर फाइल्स ने अपने पहले दिन के संग्रह में 323% की वृद्धि के साथ यह फिल्म ने अपने पहले सोमवार को किसी भारतीय फिल्म के लिए संग्रह में सबसे अधिक वृद्धि का रिकॉर्ड तोड़ दिया।[32] एक छोटे बजट की हिंदी फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस पर अकल्पनीय प्रदर्शन करते हुएयह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक त्वरित सफलता बन गई और रिलीज के पहले हफ्ते में इसने भारत में ₹97.30 करोड़ कमाए।[33] 21 मार्च 2022 तक, इस फिल्म ने भारत में ₹214.11 करोड़ और विदेशों में ₹27.94 करोड़ की कमाई से, दुनिया भर में ₹242.05 करोड़ का सकल संग्रह किया।[34]

बाधाएं[संपादित करें]

धमकियाँ मिलना[संपादित करें]

फिल्म के निर्माताओं ने कहा है कि अग्निहोत्री और उनके परिवार के खिलाफ कई हुक्म अध्यादेश जारी किए गए थे। मौत की धमकी और फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए धमकी भरे कॉल की भी सूचना मिली थी। जैसे-जैसे फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार होती गयी, धमकी भरे कॉल और संदेशों की आवृत्ति बढ़ती गई, इतना की डायरेक्टर को अपने सोशल अकाउंट डीएक्टिवेट करने पड़े।[35][36]खतरे के स्तर को देखते हुए, गृह मंत्रालय द्वारा अग्निहोत्री को भारत सरकार के माध्यम से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल से वाई-श्रेणी का सुरक्षा भी प्रदान किया गया था।[37][38]

अभियोग[संपादित करें]

एक उत्तर प्रदेश निवासी द्वारा एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी, जिसने इस आधार पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी कि, यह फिल्म मुसलमानों को कश्मीरी पंडितों के हत्यारों के रूप में चित्रित कर सकती है, इसे एक तरफा दृष्टिकोण के रूप में वर्णित किया गया है। इससे मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा भड़क सकती है। जनहित याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।[39]

कश्मीर विद्रोह के दौरान मारे गए एक भारतीय सशस्त्र बल स्क्वाड्रन नेता की विधवा द्वारा मुकदमा दायर किया गया था। विधवा के मुकदमे में कहा गया है कि फिल्म में पति की तुलना में घटनाओं का झूठा चित्रण किया गया है और इसकी रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है। तदनुसार, अदालत ने निर्माताओं को प्रासंगिक दृश्य दिखाने से रोक दिया।[40]

मुख्य पात्र[संपादित करें]




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